संवाददाता लखनऊ केसरी – ओम
20-25 साल पुराने नंबर कई शासकीय पोर्टलों और निजी दस्तावेजों से जुड़े, बदलाव से कामकाज प्रभावित होने की आशंका
लखनऊ– उत्तर प्रदेश सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने वर्तमान सीयूजी (Closed User Group) मोबाइल नंबरों को बदलने के प्रस्तावित निर्णय पर पुनर्विचार की मांग उठाई है। इस संबंध में मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव, सचिवालय प्रशासन विभाग को एक पत्र भेजकर अपनी चिंताएं जाहिर की गई हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान में उपयोग में आ रहे 94544 सीरीज के मोबाइल नंबर पिछले 20-25 वर्षों से सक्रिय हैं और अनेक महत्वपूर्ण शासकीय पोर्टलों एवं सेवाओं से जुड़े हुए हैं। इनमें ई-ऑफिस, आईजीआरएस, ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल, सीएमआईएस, विधानसभा एवं विधान परिषद कार्यालय सहित कई अन्य सरकारी प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
निजी और जरूरी सेवाओं से भी जुड़े हैं नंबर
सचिवालय कर्मियों के अनुसार ये नंबर सिर्फ सरकारी कार्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बैंक खाते, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट, गैस एवं बिजली कनेक्शन, बच्चों के स्कूल-कॉलेज और खसरा-खतौनी जैसी जरूरी सेवाओं में भी पंजीकृत हैं। ऐसे में नंबर बदलने से व्यापक स्तर पर असुविधा उत्पन्न होगी।
कामकाज पर पड़ सकता है असर
कर्मचारियों ने आशंका जताई है कि नए नंबर जारी होने की स्थिति में शासकीय कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है। विभिन्न पोर्टलों पर मोबाइल नंबर अपडेट करने में समय और तकनीकी दिक्कतें सामने आ सकती हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यों में बाधा उत्पन्न होने की संभावना है।
पोर्ट कराने का दिया सुझाव
कर्मचारियों ने अपने पत्र में सुझाव दिया है कि नए नंबर आवंटित करने के बजाय वर्तमान सीयूजी नंबरों को ही नई सेवा प्रदाता एजेंसी में पोर्ट करा दिया जाए। इससे न केवल निरंतरता बनी रहेगी, बल्कि कर्मचारियों और अधिकारियों को अनावश्यक परेशानी से भी बचाया जा सकेगा।
निर्णय पर टिकी नजरें
अब इस मामले में प्रशासन क्या फैसला लेता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। कर्मचारियों को उम्मीद है कि उनकी व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार सकारात्मक निर्णय लेगी।



