Friday, June 5, 2026

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मानवता की मिसाल: मालवीय नगर होटल अग्निकांड में दुकानदार और बेटे ने बचाईं कई जानें

लखनऊ केसरी से मुकुल सिंह की रिपोर्ट

नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में लगी भीषण आग के दौरान स्थानीय व्यवसायी रियाजुद्दीन मंसूरी और उनके पुत्र अरमान ने साहस और मानवता का परिचय देते हुए कई लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद होटल में फंसे लोगों में अफरा-तफरी का माहौल था। इसी बीच रियाजुद्दीन मंसूरी, जो क्षेत्र में मैट्रेस और गद्दों का व्यवसाय करते हैं, अपने पुत्र के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने अपनी दुकान में रखे मैट्रेस और क्विल्ट सड़क पर बिछा दिए, ताकि ऊपरी मंजिलों से जान बचाने के लिए कूदने वाले लोगों को गंभीर चोट न पहुंचे।स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी त्वरित सूझबूझ और साहसिक प्रयासों से आठ से अधिक लोगों की जान बचाई जा सकी। राहत कार्य के दौरान रियाजुद्दीन और उनके पुत्र अरमान स्वयं भी घायल हुए, लेकिन उन्होंने लोगों की सहायता करना जारी रखा।घटना के बाद क्षेत्र के निवासियों ने दोनों की बहादुरी और मानवीय संवेदनशीलता की सराहना की। लोगों का कहना है कि संकट की घड़ी में रियाजुद्दीन और अरमान ने यह साबित कर दिया कि मानवता और सेवा की भावना किसी भी पहचान से कहीं अधिक बड़ी होती है।इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि आपदा के समय आगे बढ़कर दूसरों की सहायता करने वाले सामान्य नागरिक समाज के वास्तविक नायक होते हैं। रियाजुद्दीन मंसूरी और उनके पुत्र अरमान का यह साहसिक कदम लंबे समय तक मानवता की प्रेरणादायक मिसाल के रूप में याद किया जाएगा।

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मानवता की मिसाल: मालवीय नगर होटल अग्निकांड में दुकानदार और बेटे ने बचाईं कई जानें

लखनऊ केसरी से मुकुल सिंह की रिपोर्ट

नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में लगी भीषण आग के दौरान स्थानीय व्यवसायी रियाजुद्दीन मंसूरी और उनके पुत्र अरमान ने साहस और मानवता का परिचय देते हुए कई लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद होटल में फंसे लोगों में अफरा-तफरी का माहौल था। इसी बीच रियाजुद्दीन मंसूरी, जो क्षेत्र में मैट्रेस और गद्दों का व्यवसाय करते हैं, अपने पुत्र के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने अपनी दुकान में रखे मैट्रेस और क्विल्ट सड़क पर बिछा दिए, ताकि ऊपरी मंजिलों से जान बचाने के लिए कूदने वाले लोगों को गंभीर चोट न पहुंचे।स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी त्वरित सूझबूझ और साहसिक प्रयासों से आठ से अधिक लोगों की जान बचाई जा सकी। राहत कार्य के दौरान रियाजुद्दीन और उनके पुत्र अरमान स्वयं भी घायल हुए, लेकिन उन्होंने लोगों की सहायता करना जारी रखा।घटना के बाद क्षेत्र के निवासियों ने दोनों की बहादुरी और मानवीय संवेदनशीलता की सराहना की। लोगों का कहना है कि संकट की घड़ी में रियाजुद्दीन और अरमान ने यह साबित कर दिया कि मानवता और सेवा की भावना किसी भी पहचान से कहीं अधिक बड़ी होती है।इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि आपदा के समय आगे बढ़कर दूसरों की सहायता करने वाले सामान्य नागरिक समाज के वास्तविक नायक होते हैं। रियाजुद्दीन मंसूरी और उनके पुत्र अरमान का यह साहसिक कदम लंबे समय तक मानवता की प्रेरणादायक मिसाल के रूप में याद किया जाएगा।

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