Monday, June 15, 2026

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दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन परियोजना को मिली नई गति, यात्रा समय घटकर 6-7 घंटे होने की उम्मीद

लखनऊ केसरी से मुकुल सिंह की रिपोर्ट

नई दिल्ली/कोलकाता। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश की दूसरी प्रमुख बुलेट ट्रेन परियोजना के रूप में प्रस्तावित दिल्ली-सिलीगुड़ी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ते हुए पूर्वी भारत में हाईस्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार का आधार बन सकती है।प्रस्तावित कॉरिडोर नई दिल्ली से शुरू होकर नोएडा (जेवर), मथुरा, आगरा, इटावा, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर और पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक पहुंचेगा। रेलवे भविष्य में इस कॉरिडोर को पूर्वोत्तर भारत तक विस्तारित करने की संभावनाओं पर भी विचार कर रहा है।रेल मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना दो प्रस्तावित हाईस्पीड रेल खंडों—दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड कॉरिडोर तथा वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाईस्पीड कॉरिडोर—को एकीकृत करने की अवधारणा पर आधारित है। इसके पूरा होने से उत्तर भारत और पूर्वी भारत के बीच तेज, सुरक्षित और आधुनिक रेल संपर्क स्थापित होगा।वर्तमान में दिल्ली से सिलीगुड़ी के बीच रेल यात्रा में लगभग 18 से 20 घंटे का समय लगता है। हाईस्पीड रेल सेवा शुरू होने के बाद यही दूरी लगभग 6 से 7 घंटे में तय किए जाने का अनुमान है। प्रस्तावित बुलेट ट्रेन की अधिकतम परिचालन गति 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है।कोलकाता दौरे के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पश्चिम बंगाल में करीब एक लाख करोड़ रुपये की रेलवे अवसंरचना परियोजनाओं को गति देने की भी बात कही। इन परियोजनाओं के माध्यम से राज्य के विभिन्न जिलों और प्रमुख शहरों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली-सिलीगुड़ी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के साकार होने से उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक निवेश, व्यापार तथा पर्यटन को उल्लेखनीय बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, यह परियोजना देश के पूर्वी हिस्से में आधुनिक परिवहन अवसंरचना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन परियोजना को मिली नई गति, यात्रा समय घटकर 6-7 घंटे होने की उम्मीद

लखनऊ केसरी से मुकुल सिंह की रिपोर्ट

नई दिल्ली/कोलकाता। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश की दूसरी प्रमुख बुलेट ट्रेन परियोजना के रूप में प्रस्तावित दिल्ली-सिलीगुड़ी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ते हुए पूर्वी भारत में हाईस्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार का आधार बन सकती है।प्रस्तावित कॉरिडोर नई दिल्ली से शुरू होकर नोएडा (जेवर), मथुरा, आगरा, इटावा, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर और पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक पहुंचेगा। रेलवे भविष्य में इस कॉरिडोर को पूर्वोत्तर भारत तक विस्तारित करने की संभावनाओं पर भी विचार कर रहा है।रेल मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना दो प्रस्तावित हाईस्पीड रेल खंडों—दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड कॉरिडोर तथा वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाईस्पीड कॉरिडोर—को एकीकृत करने की अवधारणा पर आधारित है। इसके पूरा होने से उत्तर भारत और पूर्वी भारत के बीच तेज, सुरक्षित और आधुनिक रेल संपर्क स्थापित होगा।वर्तमान में दिल्ली से सिलीगुड़ी के बीच रेल यात्रा में लगभग 18 से 20 घंटे का समय लगता है। हाईस्पीड रेल सेवा शुरू होने के बाद यही दूरी लगभग 6 से 7 घंटे में तय किए जाने का अनुमान है। प्रस्तावित बुलेट ट्रेन की अधिकतम परिचालन गति 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है।कोलकाता दौरे के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पश्चिम बंगाल में करीब एक लाख करोड़ रुपये की रेलवे अवसंरचना परियोजनाओं को गति देने की भी बात कही। इन परियोजनाओं के माध्यम से राज्य के विभिन्न जिलों और प्रमुख शहरों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली-सिलीगुड़ी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के साकार होने से उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक निवेश, व्यापार तथा पर्यटन को उल्लेखनीय बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, यह परियोजना देश के पूर्वी हिस्से में आधुनिक परिवहन अवसंरचना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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