Friday, June 12, 2026

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मुरादाबाद की मोड़ा तैय्या झील बनेगी नया इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन

लखनऊ केसरी से मनोज कुमार बिश्नोई की रिपोर्ट

मुरादाबाद की लगभग 40 बीघा क्षेत्र में फैली मोड़ा तैय्या झील जल्द ही एक प्रमुख इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित की जाएगी। वन विभाग की पहल पर इस प्राकृतिक झील के सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास की प्रक्रिया तेज हो गई है। इस संबंध में जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव को विस्तृत प्रस्ताव भेजा है।प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद यह स्थल न केवल स्थानीय लोगों के लिए आकर्षक पर्यटन केंद्र बनेगा, बल्कि जिम कॉर्बेट और हरिद्वार जाने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा।हाल ही में पर्यटन अधिकारी प्रदीप टम्टा एवं अन्य अधिकारियों ने झील का निरीक्षण कर प्रस्तावित विकास कार्यों की समीक्षा की। जिलाधिकारी ने बताया कि यह झील अक्टूबर से फरवरी तक प्रवासी पक्षियों से गुलजार रहती है। यहां मंगोलिया, तिब्बत, कजाकिस्तान और मध्य एशिया के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले साइबेरियन पक्षी हजारों किलोमीटर की यात्रा के बाद प्रवास करते हैं। इसके अलावा अनेक अन्य पक्षी प्रजातियां भी यहां देखी जाती हैं। झील की प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ाने का काम यहां खिलने वाले कमल के फूल करते हैं।शासन को भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार झील परिसर में लगभग 200 लोगों के बैठने की व्यवस्था, बर्ड वॉचिंग टावर, कैफे, मॉडल संग्रहालय, शौचालय ब्लॉक तथा सोलर पैनल जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन सुविधाओं के माध्यम से पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

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मुरादाबाद की मोड़ा तैय्या झील बनेगी नया इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन

लखनऊ केसरी से मनोज कुमार बिश्नोई की रिपोर्ट

मुरादाबाद की लगभग 40 बीघा क्षेत्र में फैली मोड़ा तैय्या झील जल्द ही एक प्रमुख इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित की जाएगी। वन विभाग की पहल पर इस प्राकृतिक झील के सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास की प्रक्रिया तेज हो गई है। इस संबंध में जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव को विस्तृत प्रस्ताव भेजा है।प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद यह स्थल न केवल स्थानीय लोगों के लिए आकर्षक पर्यटन केंद्र बनेगा, बल्कि जिम कॉर्बेट और हरिद्वार जाने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा।हाल ही में पर्यटन अधिकारी प्रदीप टम्टा एवं अन्य अधिकारियों ने झील का निरीक्षण कर प्रस्तावित विकास कार्यों की समीक्षा की। जिलाधिकारी ने बताया कि यह झील अक्टूबर से फरवरी तक प्रवासी पक्षियों से गुलजार रहती है। यहां मंगोलिया, तिब्बत, कजाकिस्तान और मध्य एशिया के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले साइबेरियन पक्षी हजारों किलोमीटर की यात्रा के बाद प्रवास करते हैं। इसके अलावा अनेक अन्य पक्षी प्रजातियां भी यहां देखी जाती हैं। झील की प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ाने का काम यहां खिलने वाले कमल के फूल करते हैं।शासन को भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार झील परिसर में लगभग 200 लोगों के बैठने की व्यवस्था, बर्ड वॉचिंग टावर, कैफे, मॉडल संग्रहालय, शौचालय ब्लॉक तथा सोलर पैनल जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन सुविधाओं के माध्यम से पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

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