लखनऊ केसरी से मुकुल सिंह की रिपोर्ट
लखनऊ। एक ओर राजधानी लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए करोड़ों रुपये की परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर शहर की मूलभूत नागरिक सुविधाओं की स्थिति कई स्थानों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।राजधानी से लगभग 15 किलोमीटर दूर, संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (पीजीआई) के ठीक सामने पिछले तीन महीनों से अधिक समय से नालियों का बदबूदार और गंदा पानी सड़क पर बह रहा है। इससे न केवल राहगीरों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि क्षेत्र में संक्रमण और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ रहे हैं।स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस समस्या की ओर न तो नगर निगम का ध्यान है और न ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) का, जबकि सड़क के रखरखाव और मरम्मत के लिए शेरपुर टोल प्लाजा पर नियमित रूप से टोल शुल्क वसूला जाता है।विडंबना यह है कि इसी मार्ग से प्रतिदिन अनेक न्यायिक अधिकारी, मंत्री, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी गुजरते हैं, इसके बावजूद समस्या का समाधान अब तक नहीं हो सका है। लगातार सड़क पर बह रहे गंदे पानी से यातायात प्रभावित हो रहा है और आम नागरिकों को दुर्गंध तथा असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।क्षेत्रवासियों ने संबंधित विभागों से तत्काल संज्ञान लेते हुए जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने तथा सड़क को सुरक्षित एवं स्वच्छ बनाने की मांग की है। यह स्थिति स्मार्ट सिटी के दावों और जमीनी हकीकत के बीच मौजूद अंतर को भी उजागर करती है।



