सब रजिस्ट्रार कार्यालय ने संपत्तियों की खरीद-बिक्री को सुरक्षित बनाने के लिए उठाए सख्त कदम
रजिस्ट्री के सरकारी दस्तावेजों में दर्ज होंगे आधार के केवल अंतिम 4 अंक
बिना क्रेता, विक्रेता और गवाहों के बयान दर्ज किए नहीं होगा बैनामा।
मोहनलालगंज। संवाददाता
मोहनलालगंज तहसील में संपत्तियों की रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए उप निबंधक कार्यालय ने नियमों में व्यापक फेरबदल किया है। सब रजिस्ट्रार विभा द्विवेदी तिवारी ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत अब ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराते समय आधार सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। इस कदम से न केवल दस्तावेजों की प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी, बल्कि आम जनता के समय की भी भारी बचत होगी।
छिपी रहेगी आधार की जानकारी
सब रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया कि आमजन की गोपनीयता और सुरक्षा को सर्वोपरि रखा गया है। नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री अभिलेखों में आधार संख्या के केवल अंतिम चार अंक ही दर्ज किए जाएंगे। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि भविष्य में यदि कोई व्यक्ति रजिस्ट्री की नकल (कॉपी) निकलवाता है, तो भी मुख्य आवदेक की व्यक्तिगत और गोपनीय जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।
स्टाम्प पेपर पर नहीं लगेंगे फोटो
बदलाव के तहत अब क्रेता और विक्रेता के फोटो स्टाम्प पेपर पर लगाने के बजाय सीधे बैनामे (सेल डीड) के मुख्य पेपर पर चस्पा किए जाएंगे। सब रजिस्ट्रार के मुताबिक, अक्सर दस्तावेजों की स्कैनिंग के दौरान स्टाम्प पेपर के क्षतिग्रस्त होने की संभावना रहती थी, जिसे इस नई तकनीकी व्यवस्था से दूर कर लिया गया है।
बयान दर्ज होना जरूरी, फर्जीवाड़े पर कसेगा शिकंजा
रजिस्ट्री में होने वाले खेल और धोखाधड़ी को रोकने के लिए अब बैनामा निष्पादन के समय क्रेता, विक्रेता और दोनों गवाहों के बयान अनिवार्य रूप से दर्ज किए जाएंगे। बिना बयान दर्ज किए दस्तावेज की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इस सख्त नियम से फर्जीवाड़े की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
बुजुर्गों और महिलाओं को मिलेगी राहत, सबके लिए एक नियम
विभा द्विवेदी तिवारी ने बताया कि रजिस्ट्री दफ्तर आने वाले आम लोगों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को होने वाली दिक्कतों को देखते हुए ही ये सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं।उधर, तहसील परिसर में इस नए बदलाव की जमकर चर्चा है। अब तक यह देखा जाता था कि कुछ रसूखदार और प्रभावशाली लोग बिना तय नंबर या तय प्रक्रिया के सीधे आकर अपनी रजिस्ट्री करवा लेते थे। लेकिन अब ‘सभी के लिए एक समान नियम’ लागू होने से वीआईपी संस्कृति पर लगाम लगेगी और दफ्तर में पारदर्शिता व जवाबदेही तय होगी।
अनुराग तिवारी



