लखनऊ केसरी से मुकुल सिंह की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती के पीछे सरकार के कुप्रबंधन के कारण झेलनी पड़ रही है बिजली कटौती। दरअसल, एक बड़ी वजह कई पावर प्लांटों का बिजली उत्पादन बंद होना भी है। ये पावर प्लांट यूपी और अन्य राज्यों में लगे हैं। पावर कॉरपोरेशन ने इनसे बिजली खरीद का करार किया है। जानकारों के मुताबिक, इन पावर प्लांट के बंद होना भी राज्य में अघोषित बिजली कटौती का बड़ा कारण है।मई में पावर कॉरपोरेशन को बिजली देने वाले करीब एक दर्जन पावर प्लांट कुछ दिनों के लिए बंद रहे, जिसकी वजह से पावर कॉरपोरेशन को बिजली नहीं मिल सकी। इसमें 660 मेगावाट का एक पावर प्लांट तो 15 दिनों तक बंद रहा। वहीं, दूसरा प्लांट 11 दिनों तक बंद रहा। 22 मई को अब तक के इतिहास में में एक दिन में सबसे ज्यादा बिजली, 669 मिलियन यूनिट आपूर्ति की गई। जब मांग इस कदर बढ़ी हुई तो पावर प्लांट का बंद होना सवालिया निशान खड़े कर रहा है।राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आरोप लगाया है कि बिजली उत्पादन इकाइयों के रखरखाव, कोयला प्रबंधन और सिस्टम क्षमता विस्तार में लापरवाही के कारण प्रदेश की जनता को अघोषित बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पावर प्लांट कई-कई दिनों तक बंद रहने की वजह से हजारों मेगावॉट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ और ग्रामीण इलाकों में भारी बिजली कटौती करनी पड़ी। इसे किसी भी सूरत में लापरवाही से कम नहीं माना जा सकता। अगर पावर प्लांट चलते और बिजली की ज्यादा उपलब्धता होती तो अधिकतम मांग का आंकड़ा और ऊपर जाता। उपभोक्ता परिषद ने बंद पड़ी उत्पादन इकाइयों को तत्काल चालू करने की मांग की है।ये प्लांट मई में रहे बंदघाटमपुर – 660 मेगावॉट (18 दिन)ललितपुर – 660 मेगावॉट (11 दिन)जेएसडब्ल्यू महानदी (कोरबा) – 1000 मेगावॉट (10 दिन)ओबरा-बी – 200 मेगावॉट (9.5 दिन)ओबरा-सी – 660 मेगावॉट (8 दिन)अनपरा-डी – 500 मेगावॉट (6.5 दिन)जवाहरपुर – 660 मेगावॉट (4 दिन)अनपरा – 210 मेगावॉट (4 दिन)लैको – 600 मेगावॉट (3 दिन)पारिछा – 250 मेगावॉट (3 दिन)खुर्जा – 660 मेगावॉट (1 दिन)उपभोक्ता भारी-भरकम बिजली शुल्क अदा कर रहे है। इसके बावजूद बिजली आपूर्ति का सिस्टम सुदृढ़ नहीं किया जा रहा है। राज्य में लगभग 3 करोड 73 लाख विद्युत उपभोक्ता है। इन्होंने कुल 8 करोड़ 57 लाख किलोवॉट से ज्यादा का लोड संयोजित करवाया है। वहीं, 132 केवी उपकेंद्रों की कुल क्षमता 6 करोड 25 लाख 76 हजार किलोवॉट है।



