आकाश दीप अवस्थी – लखनऊ केसरी
उत्तर प्रदेश- राज्य में इन दिनों बढ़ती बिजली कटौती और बार-बार ट्रिपिंग की समस्या ने आम जनता की परेशानी को चरम पर पहुंचा दिया है। खासकर राजधानी लखनऊ सहित कई जिलों में आपूर्ति व्यवस्था चरमराती नजर आ रही है। ऐसे में शक्ति भवन में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक और उसमें दिए गए सख्त निर्देश स्वागतयोग्य कदम हैं, लेकिन असली चुनौती इन निर्देशों को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने की है।
UPPCL अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल के नेतृत्व में हुई इस बैठक में अधिकारियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने और ट्रिपिंग की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं। यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन जिलों में आपूर्ति बाधित होगी, वहां संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। यह रुख निश्चित रूप से प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक संकेत है।
हालांकि, सवाल यह उठता है कि आखिर बार-बार ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हो रही है। क्या मौजूदा ढांचा बढ़ती मांग के अनुरूप सक्षम नहीं है, या फिर रखरखाव और प्रबंधन में कहीं कमी रह जाती है? गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ना स्वाभाविक है, ऐसे में पूर्व तैयारी और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की अपेक्षा की जाती है।
जनता का आक्रोश भी अब सड़कों पर दिखने लगा है, जो इस बात का संकेत है कि समस्या केवल तकनीकी नहीं, बल्कि जन-जीवन से सीधे जुड़ी हुई है। सरकार और बिजली विभाग को चाहिए कि वे अल्पकालिक समाधान के साथ-साथ दीर्घकालिक योजनाओं पर भी गंभीरता से काम करें—जैसे वितरण तंत्र का आधुनिकीकरण, लाइन लॉस में कमी, और स्मार्ट ग्रिड जैसी तकनीकों का विस्तार।
निर्देश देना आसान है, लेकिन उन्हें प्रभावी रूप से लागू करना ही असली परीक्षा है। अब देखना यह होगा कि शक्ति भवन की यह बैठक केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह जाती है या वास्तव में प्रदेश की जनता को राहत दिलाने में सफल होती है।



