मुरादाबाद : लखनऊ केसरी से मनोज कुमार विश्नोई की रिपोर्ट
जनपद मुरादाबाद में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक अब गंभीर जनस्वास्थ्य और सुरक्षा का मुद्दा बनता जा रहा है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 50 से 60 नए मरीज एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं, जबकि पुराने मरीजों को मिलाकर यह संख्या लगभग 100 तक पहुंच रही है। यह आंकड़े जिले में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके हमलों की भयावह स्थिति को स्पष्ट करते हैं।करीब 40 लाख की आबादी वाले मुरादाबाद जिले में चार तहसील, पांच कस्बे और सैकड़ों ग्राम पंचायतों में आवारा कुत्तों के झुंड आम दृश्य बन चुके हैं। शहर से लेकर देहात तक, हर गली-मोहल्ले में कुत्तों का आतंक देखने को मिल रहा है। स्थिति यह है कि बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग अकेले घर से निकलने में असहज महसूस कर रहे हैं। विशेषकर सुबह और शाम के समय बुजुर्गों ने टहलना तक कम कर दिया है।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कुत्तों के काटने के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति न केवल चोटों का कारण बन रही है, बल्कि रेबीज जैसी घातक बीमारी के खतरे को भी बढ़ा रही है, जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती है।इस मुद्दे पर Supreme Court of India भी चिंता जता चुका है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा है कि नागरिकों को बिना भय के स्वतंत्र रूप से आवागमन का अधिकार है, और यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।नगर निगम और स्थानीय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण पाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कुत्तों को पकड़ना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि बड़े पैमाने पर नसबंदी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) और टीकाकरण अभियान चलाना आवश्यक है। साथ ही, शहर में कचरा प्रबंधन की बदहाल व्यवस्था भी कुत्तों के झुंड बढ़ने का प्रमुख कारण मानी जा रही है।स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।



