Friday, July 31, 2026

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अयोध्या में बड़ा बदलाव संभवचढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की चर्चाएं तेज

लखनऊ केसरी से ओम की रिपोर्ट

अयोध्या।रामनगरी अयोध्या में स्थित भव्य श्रीराम मंदिर से जुड़े श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव होने की संभावनाएं तेज हो गई हैं। मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफों की चर्चाओं ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।सूत्रों के अनुसार यदि दोनों पदों पर इस्तीफे औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिए जाते हैं, तो पहले से रिक्त एक अन्य ट्रस्टी पद को मिलाकर ट्रस्ट के तीन महत्वपूर्ण पद खाली हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार द्वारा गठित मौजूदा ट्रस्ट के पुनर्गठन अथवा पूर्ण पुनर्संरचना की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।गौरतलब है कि फरवरी 2020 में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय के अनुपालन में केंद्र सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास बनाए गए, जबकि संगठनात्मक और प्रशासनिक संचालन की प्रमुख जिम्मेदारी महासचिव चंपत राय को सौंपी गई थी। मंदिर निर्माण, वित्तीय प्रबंधन, भूमि क्रय, निर्माण एजेंसियों के समन्वय तथा अन्य महत्वपूर्ण निर्णयों में चंपत राय की भूमिका अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती रही है। वहीं ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र भी ट्रस्ट के प्रमुख रणनीतिक निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों प्रमुख पदों के रिक्त होने से ट्रस्ट की वर्तमान प्रशासनिक संरचना का संतुलन प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि अब ट्रस्ट के भीतर प्रशासनिक जवाबदेही और निगरानी प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।राम मंदिर में प्रतिदिन करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है। इसके अतिरिक्त हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था, दर्शन प्रबंधन, निर्माण कार्य, खरीद प्रक्रिया, लेखा प्रणाली तथा मानव संसाधन प्रबंधन जैसे कार्यों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना ट्रस्ट के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।सूत्र बताते हैं कि हालिया घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक स्तर पर कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इनमें ट्रस्ट के पुनर्गठन, नए सदस्यों की नियुक्ति, वित्तीय ऑडिट प्रणाली को सशक्त बनाने तथा स्वतंत्र निगरानी तंत्र लागू करने जैसे प्रस्ताव शामिल हो सकते हैं।हालांकि अभी तक केंद्र सरकार या ट्रस्ट की ओर से किसी आधिकारिक निर्णय की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन अयोध्या और राजनीतिक गलियारों में इस विषय को लेकर चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। आने वाले दिनों में ट्रस्ट की संरचना और संचालन व्यवस्था को लेकर बड़ा निर्णय सामने आ सकता है

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अयोध्या में बड़ा बदलाव संभवचढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की चर्चाएं तेज

लखनऊ केसरी से ओम की रिपोर्ट

अयोध्या।रामनगरी अयोध्या में स्थित भव्य श्रीराम मंदिर से जुड़े श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव होने की संभावनाएं तेज हो गई हैं। मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफों की चर्चाओं ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।सूत्रों के अनुसार यदि दोनों पदों पर इस्तीफे औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिए जाते हैं, तो पहले से रिक्त एक अन्य ट्रस्टी पद को मिलाकर ट्रस्ट के तीन महत्वपूर्ण पद खाली हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार द्वारा गठित मौजूदा ट्रस्ट के पुनर्गठन अथवा पूर्ण पुनर्संरचना की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।गौरतलब है कि फरवरी 2020 में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय के अनुपालन में केंद्र सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास बनाए गए, जबकि संगठनात्मक और प्रशासनिक संचालन की प्रमुख जिम्मेदारी महासचिव चंपत राय को सौंपी गई थी। मंदिर निर्माण, वित्तीय प्रबंधन, भूमि क्रय, निर्माण एजेंसियों के समन्वय तथा अन्य महत्वपूर्ण निर्णयों में चंपत राय की भूमिका अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती रही है। वहीं ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र भी ट्रस्ट के प्रमुख रणनीतिक निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों प्रमुख पदों के रिक्त होने से ट्रस्ट की वर्तमान प्रशासनिक संरचना का संतुलन प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि अब ट्रस्ट के भीतर प्रशासनिक जवाबदेही और निगरानी प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।राम मंदिर में प्रतिदिन करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है। इसके अतिरिक्त हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था, दर्शन प्रबंधन, निर्माण कार्य, खरीद प्रक्रिया, लेखा प्रणाली तथा मानव संसाधन प्रबंधन जैसे कार्यों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना ट्रस्ट के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।सूत्र बताते हैं कि हालिया घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक स्तर पर कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इनमें ट्रस्ट के पुनर्गठन, नए सदस्यों की नियुक्ति, वित्तीय ऑडिट प्रणाली को सशक्त बनाने तथा स्वतंत्र निगरानी तंत्र लागू करने जैसे प्रस्ताव शामिल हो सकते हैं।हालांकि अभी तक केंद्र सरकार या ट्रस्ट की ओर से किसी आधिकारिक निर्णय की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन अयोध्या और राजनीतिक गलियारों में इस विषय को लेकर चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। आने वाले दिनों में ट्रस्ट की संरचना और संचालन व्यवस्था को लेकर बड़ा निर्णय सामने आ सकता है

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