Wednesday, June 17, 2026

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आशियाना के सेक्टर-एच अन्नपूर्णा मार्केट में गूंजा भक्ति और सेवा का संगम, बड़े मंगल पर विशाल भंडारे का आयोजन

लखनऊ केसरी से मुकुल सिंह की रिपोर्ट

लखनऊ, 6 जून 2026। राजधानी के आशियाना स्थित सेक्टर-एच अन्नपूर्णा मार्केट में शनिवार को बड़े मंगल के पावन अवसर पर भक्ति, श्रद्धा और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूरे बाजार क्षेत्र में हनुमान भक्तों का उत्साह चरम पर था और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय रंग में रंगा नजर आया। हनुमान जी के जयकारों तथा मधुर भजनों की स्वर लहरियों से पूरा परिसर देर तक गुंजायमान रहा।कार्यक्रम के दौरान “पवनसुत विनती बारंबार”, “आरती की जय हनुमान लला की”, “हो रहा है भंडारा भैया हनुमान जी का” तथा “राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में” जैसे लोकप्रिय भजनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। भजनों की मधुर प्रस्तुति ने ऐसा आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया कि उपस्थित श्रद्धालु स्वयं को भक्ति भाव में डूबने से रोक नहीं सके। महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों सहित बड़ी संख्या में भक्तों ने भजनों पर झूमते हुए प्रभु श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी की महिमा का गुणगान किया।संध्या समय विधि-विधान के साथ हनुमान जी की आरती संपन्न हुई। आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने एक स्वर में जयकारे लगाए, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय ऊर्जा से भर उठा। आरती के पश्चात समाजसेवा और जनकल्याण की भावना को आगे बढ़ाते हुए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विकास सिंह, पुष्पेंद्र सिंह एवं अन्य श्रद्धालु भक्तों ने पूर्ण समर्पण और सेवा भाव के साथ भंडारे की व्यवस्था संभाली तथा आगंतुक श्रद्धालुओं का स्वागत किया।भंडारे में प्रसाद स्वरूप आम का पन्ना, शीतल पेयजल, पूरी-सब्जी, बूंदी, कढ़ी-चावल सहित विभिन्न व्यंजनों का वितरण किया गया। भीषण गर्मी के बीच आम का पन्ना और ठंडे जल की व्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर आयोजन समिति के सेवा भाव की सराहना की। आयोजन स्थल पर अनुशासन, स्वच्छता और व्यवस्थाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा कि बड़े मंगल का पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, परोपकार और मानव सेवा का भी संदेश देता है। लखनऊ की सांस्कृतिक पहचान बन चुके बड़े मंगल के अवसर पर आयोजित भंडारे वर्षों से लोगों को जोड़ने और सेवा की भावना को मजबूत करने का कार्य करते आ रहे हैं।उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बड़े मंगल का विशेष महत्व है। ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले बड़े मंगल पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में हनुमान भक्तों द्वारा भंडारे, जल सेवा और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन आयोजनों में समाज के सभी वर्गों के लोग बिना किसी भेदभाव के शामिल होते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं। यही परंपरा गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक एकता की मिसाल प्रस्तुत करती है।आशियाना के सेक्टर-एच अन्नपूर्णा मार्केट में आयोजित यह कार्यक्रम भी इसी परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण बना, जहां भक्ति और सेवा का समन्वय देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने हनुमान जी से प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की तथा भविष्य में भी ऐसे सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया।बड़ा मंगल केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि मानवता, भाईचारे, सामाजिक सद्भाव और निस्वार्थ सेवा की जीवंत अभिव्यक्ति है। ऐसे आयोजन समाज में प्रेम, सहयोग और एकता की भावना को सशक्त बनाने का कार्य करते हैं तथा भारतीय संस्कृति के मूल आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनते हैं।

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आशियाना के सेक्टर-एच अन्नपूर्णा मार्केट में गूंजा भक्ति और सेवा का संगम, बड़े मंगल पर विशाल भंडारे का आयोजन

लखनऊ केसरी से मुकुल सिंह की रिपोर्ट

लखनऊ, 6 जून 2026। राजधानी के आशियाना स्थित सेक्टर-एच अन्नपूर्णा मार्केट में शनिवार को बड़े मंगल के पावन अवसर पर भक्ति, श्रद्धा और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूरे बाजार क्षेत्र में हनुमान भक्तों का उत्साह चरम पर था और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय रंग में रंगा नजर आया। हनुमान जी के जयकारों तथा मधुर भजनों की स्वर लहरियों से पूरा परिसर देर तक गुंजायमान रहा।कार्यक्रम के दौरान “पवनसुत विनती बारंबार”, “आरती की जय हनुमान लला की”, “हो रहा है भंडारा भैया हनुमान जी का” तथा “राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में” जैसे लोकप्रिय भजनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। भजनों की मधुर प्रस्तुति ने ऐसा आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया कि उपस्थित श्रद्धालु स्वयं को भक्ति भाव में डूबने से रोक नहीं सके। महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों सहित बड़ी संख्या में भक्तों ने भजनों पर झूमते हुए प्रभु श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी की महिमा का गुणगान किया।संध्या समय विधि-विधान के साथ हनुमान जी की आरती संपन्न हुई। आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने एक स्वर में जयकारे लगाए, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय ऊर्जा से भर उठा। आरती के पश्चात समाजसेवा और जनकल्याण की भावना को आगे बढ़ाते हुए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विकास सिंह, पुष्पेंद्र सिंह एवं अन्य श्रद्धालु भक्तों ने पूर्ण समर्पण और सेवा भाव के साथ भंडारे की व्यवस्था संभाली तथा आगंतुक श्रद्धालुओं का स्वागत किया।भंडारे में प्रसाद स्वरूप आम का पन्ना, शीतल पेयजल, पूरी-सब्जी, बूंदी, कढ़ी-चावल सहित विभिन्न व्यंजनों का वितरण किया गया। भीषण गर्मी के बीच आम का पन्ना और ठंडे जल की व्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर आयोजन समिति के सेवा भाव की सराहना की। आयोजन स्थल पर अनुशासन, स्वच्छता और व्यवस्थाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा कि बड़े मंगल का पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, परोपकार और मानव सेवा का भी संदेश देता है। लखनऊ की सांस्कृतिक पहचान बन चुके बड़े मंगल के अवसर पर आयोजित भंडारे वर्षों से लोगों को जोड़ने और सेवा की भावना को मजबूत करने का कार्य करते आ रहे हैं।उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बड़े मंगल का विशेष महत्व है। ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले बड़े मंगल पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में हनुमान भक्तों द्वारा भंडारे, जल सेवा और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन आयोजनों में समाज के सभी वर्गों के लोग बिना किसी भेदभाव के शामिल होते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं। यही परंपरा गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक एकता की मिसाल प्रस्तुत करती है।आशियाना के सेक्टर-एच अन्नपूर्णा मार्केट में आयोजित यह कार्यक्रम भी इसी परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण बना, जहां भक्ति और सेवा का समन्वय देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने हनुमान जी से प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की तथा भविष्य में भी ऐसे सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया।बड़ा मंगल केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि मानवता, भाईचारे, सामाजिक सद्भाव और निस्वार्थ सेवा की जीवंत अभिव्यक्ति है। ऐसे आयोजन समाज में प्रेम, सहयोग और एकता की भावना को सशक्त बनाने का कार्य करते हैं तथा भारतीय संस्कृति के मूल आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनते हैं।

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