दिल्ली केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल करते हुए एथेनॉल आधारित चूल्हे की तकनीक पेश की है। गडकरी ने दावा किया कि यह नया चूल्हा पारंपरिक एलपीजी सिलेंडर की तुलना में सस्ता साबित हो सकता है और इससे आम लोगों के रसोई खर्च में कमी आएगी।
नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने बताया कि यह स्वदेशी तकनीक एथेनॉल और पानी के मिश्रण से चलती है। उनके अनुसार करीब 7 प्रतिशत एथेनॉल के मिश्रण से ऐसी लौ तैयार की जा सकती है, जिस पर खाना पकाना संभव है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक न केवल सस्ती है बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।
सरकार लंबे समय से एथेनॉल को पेट्रोल और अन्य ईंधनों के विकल्प के रूप में बढ़ावा दे रही है। गडकरी ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 87 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिससे देश पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। ऐसे में एथेनॉल आधारित तकनीकें देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है तो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इसका असर दिखाई दे सकता है। इससे एलपीजी पर निर्भरता कम होगी और किसानों को भी फायदा मिल सकता है, क्योंकि एथेनॉल का उत्पादन गन्ने और कृषि अवशेषों से किया जाता है।
हालांकि, इस तकनीक को लेकर बहस भी शुरू हो गई है। कुछ वैज्ञानिकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाए हैं कि केवल 7 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण से स्थायी और प्रभावी लौ कैसे संभव होगी। इस पर वैज्ञानिकों ने कहा कि तकनीकी रूप से यह संभव है, लेकिन इसके लिए विशेष इंजीनियरिंग और नियंत्रित प्रणाली की जरूरत होगी।
सोशल मीडिया और रेडिट जैसे प्लेटफॉर्म पर भी इस पहल को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे भारत की हरित ऊर्जा क्रांति की दिशा में बड़ा कदम बताया, जबकि कुछ ने इसकी व्यवहारिकता और लागत को लेकर सवाल उठाए।
गडकरी पहले भी एथेनॉल आधारित ईंधन और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देते रहे हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि आने वाले समय में भारत 100 प्रतिशत बायो-एथेनॉल आधारित ईंधन की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
अनुराग तिवारी की रिपोर्ट



