Thursday, May 28, 2026

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पीजीआई के आसपास बिना लाइसेंस चल रही जूस और खान-पान की दुकानें, स्वास्थ्य पर खतरा….

रायबरेली रोड स्थित पीजीआई के आसपास इन दिनों बड़ी संख्या में जूस की दुकानें, ठेले और पटरी पर खान-पान की वस्तुएं बेचने वाले नजर आ रहे हैं। सड़क किनारे लगने वाली इन दुकानों पर लोगों की भारी भीड़ जुटती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अधिकांश दुकानदारों के पास न तो FSSAI लाइसेंस है और न ही स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े जरूरी प्रमाणपत्र।स्थानीय लोगों का कहना है कि खुले में खाद्य पदार्थ तैयार किए जा रहे हैं, जहां साफ-सफाई के मानकों का पालन नहीं हो रहा। जूस, चाट, फास्ट फूड और अन्य खाद्य सामग्री बिना किसी निगरानी के बेची जा रही है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार खाने-पीने की वस्तुएं बेचने वाले हर दुकानदार के लिए FSSAI रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस अनिवार्य है। इसके अलावा नगर निगम से ट्रेड लाइसेंस और स्वच्छता मानकों का पालन भी जरूरी होता है। बावजूद इसके, पीजीआई क्षेत्र में बड़ी संख्या में दुकानें बिना किसी वैध अनुमति के संचालित हो रही हैं।स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब दुकानदारों से FSSAI लाइसेंस या अन्य जरूरी दस्तावेज दिखाने के लिए कहा जाता है, तो कई बार वे बहस और झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी उन भोले-भाले तीमारदारों को उठानी पड़ रही है, जो अपने मरीजों को इलाज के लिए पीजीआई लेकर आते हैं। मजबूरी में उन्हें इन्हीं छोटे दुकानदारों से खाना-पीना खरीदना पड़ता है, जबकि उन्हें खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है।जब हमारे संवाददाता ने पाठक परिसर में चल रहे एक जूस कॉर्नर संचालक अनवरउल हक से लाइसेंस दिखाने की मांग की, तो वह आग-बबूला हो गया और कथित तौर पर देख लेने की धमकी देने लगा। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बिना लाइसेंस और मानकों के विपरीत चल रहे इन जूस कॉर्नरों पर कार्रवाई कब होगी।जानकारों के अनुसार कई जूस और खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानदार स्वाद बढ़ाने और लागत कम करने के लिए सैकरीन (Saccharin) जैसे कृत्रिम स्वीटनर का इस्तेमाल करते हैं। यह पदार्थ चीनी से कई गुना अधिक मीठा होता है। हालांकि सीमित मात्रा में कुछ उत्पादों में इसकी अनुमति है, लेकिन बिना मानक और बिना जानकारी के अधिक मात्रा में इसका उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले ऐसे पदार्थ लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकते हैं।स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग से मांग की है कि क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर जांच की जाए और बिना लाइसेंस चल रही दुकानों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि मरीजों और तीमारदारों को सुरक्षित एवं स्वच्छ खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके।

लखनऊ केसरी से सनी पाण्डेय की रिपोर्ट

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पीजीआई के आसपास बिना लाइसेंस चल रही जूस और खान-पान की दुकानें, स्वास्थ्य पर खतरा….

रायबरेली रोड स्थित पीजीआई के आसपास इन दिनों बड़ी संख्या में जूस की दुकानें, ठेले और पटरी पर खान-पान की वस्तुएं बेचने वाले नजर आ रहे हैं। सड़क किनारे लगने वाली इन दुकानों पर लोगों की भारी भीड़ जुटती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अधिकांश दुकानदारों के पास न तो FSSAI लाइसेंस है और न ही स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े जरूरी प्रमाणपत्र।स्थानीय लोगों का कहना है कि खुले में खाद्य पदार्थ तैयार किए जा रहे हैं, जहां साफ-सफाई के मानकों का पालन नहीं हो रहा। जूस, चाट, फास्ट फूड और अन्य खाद्य सामग्री बिना किसी निगरानी के बेची जा रही है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार खाने-पीने की वस्तुएं बेचने वाले हर दुकानदार के लिए FSSAI रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस अनिवार्य है। इसके अलावा नगर निगम से ट्रेड लाइसेंस और स्वच्छता मानकों का पालन भी जरूरी होता है। बावजूद इसके, पीजीआई क्षेत्र में बड़ी संख्या में दुकानें बिना किसी वैध अनुमति के संचालित हो रही हैं।स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब दुकानदारों से FSSAI लाइसेंस या अन्य जरूरी दस्तावेज दिखाने के लिए कहा जाता है, तो कई बार वे बहस और झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी उन भोले-भाले तीमारदारों को उठानी पड़ रही है, जो अपने मरीजों को इलाज के लिए पीजीआई लेकर आते हैं। मजबूरी में उन्हें इन्हीं छोटे दुकानदारों से खाना-पीना खरीदना पड़ता है, जबकि उन्हें खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है।जब हमारे संवाददाता ने पाठक परिसर में चल रहे एक जूस कॉर्नर संचालक अनवरउल हक से लाइसेंस दिखाने की मांग की, तो वह आग-बबूला हो गया और कथित तौर पर देख लेने की धमकी देने लगा। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बिना लाइसेंस और मानकों के विपरीत चल रहे इन जूस कॉर्नरों पर कार्रवाई कब होगी।जानकारों के अनुसार कई जूस और खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानदार स्वाद बढ़ाने और लागत कम करने के लिए सैकरीन (Saccharin) जैसे कृत्रिम स्वीटनर का इस्तेमाल करते हैं। यह पदार्थ चीनी से कई गुना अधिक मीठा होता है। हालांकि सीमित मात्रा में कुछ उत्पादों में इसकी अनुमति है, लेकिन बिना मानक और बिना जानकारी के अधिक मात्रा में इसका उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले ऐसे पदार्थ लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकते हैं।स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग से मांग की है कि क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर जांच की जाए और बिना लाइसेंस चल रही दुकानों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि मरीजों और तीमारदारों को सुरक्षित एवं स्वच्छ खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके।

लखनऊ केसरी से सनी पाण्डेय की रिपोर्ट

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