Thursday, May 28, 2026

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लखनऊ: ट्रैफिक जाम पर हाईकोर्ट सख्त, अफसरों को स्थायी समाधान के निर्देश…

लखनऊ में ट्रैफिक जाम पर हाईकोर्ट सख्त, अफसरों को स्थायी समाधान निकालने के निर्देशलखनऊ शहर में लगातार बढ़ती ट्रैफिक समस्या और लंबे जाम को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा कि राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में वर्षों से ट्रैफिक जाम की समस्या बनी हुई है, लेकिन प्रशासन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं निकाल पाया है। कोर्ट ने अधिकारियों के जवाब पर नाराजगी जताते हुए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।पॉलिटेक्निक से किसान पथ तक जाम पर कोर्ट की नाराजगीसुनवाई के दौरान अदालत ने विशेष रूप से पॉलिटेक्निक चौराहे से किसान पथ तक रोजाना लगने वाले भारी जाम का मुद्दा उठाया। कोर्ट ने कहा कि इस मार्ग पर हजारों लोग प्रतिदिन घंटों जाम में फंसते हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राजधानी की सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है और संबंधित विभाग केवल अस्थायी उपायों तक सीमित हैं। जबकि समस्या का स्थायी और वैज्ञानिक समाधान जरूरी है।डीसीपी ट्रैफिक समेत कई अधिकारी कोर्ट में हुए पेशमामले की सुनवाई के दौरान लखनऊ पुलिस के डीसीपी ट्रैफिक, पूर्वी जोन के अधिकारी लखनऊ म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के अधिकारी अदालत में उपस्थित हुए। कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि आखिर इतने वर्षों बाद भी ट्रैफिक समस्या का प्रभावी समाधान क्यों नहीं निकाला जा सका।अदालत ने अधिकारियों के प्रस्तुत जवाबों पर असंतोष जताया और कहा कि केवल औपचारिक जवाब देकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। जनता रोजाना जाम की समस्या से जूझ रही है और प्रशासन की जवाबदेही तय होना आवश्यक है।जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सख्तीयह मामला शहर की ट्रैफिक अव्यवस्था को लेकर दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में कहा गया था कि राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर नियमित रूप से भारी जाम लगता है, जिससे लोगों का समय और ईंधन दोनों बर्बाद हो रहे हैं। साथ ही दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है।याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि स्कूल, ऑफिस और अस्पताल जाने वाले लोगों को रोजाना भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार एंबुलेंस तक जाम में फंस जाती हैं।हाईकोर्ट ने मांगी विस्तृत कार्ययोजनाअदालत ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे ट्रैफिक जाम की समस्या के स्थायी समाधान के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करें। इसमें सड़क चौड़ीकरण, अतिक्रमण हटाने, ट्रैफिक प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था और वैकल्पिक मार्गों जैसे बिंदुओं पर स्पष्ट योजना शामिल करने को कहा गया है।कोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश देते हुए कहा कि अगली सुनवाई में संबंधित अधिकारी पूरी रिपोर्ट के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों।जनता को राहत मिलने की उम्मीदहाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि राजधानी में लंबे समय से चली आ रही ट्रैफिक समस्या के समाधान की दिशा में प्रशासन गंभीर कदम उठा सकता है। शहरवासियों का कहना है कि यदि प्रभावी योजना लागू की गई तो रोजाना लगने वाले जाम से काफी राहत मिल सकती है।

लखनऊ केसरी से ओम की रिपोर्ट

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लखनऊ: ट्रैफिक जाम पर हाईकोर्ट सख्त, अफसरों को स्थायी समाधान के निर्देश…

लखनऊ में ट्रैफिक जाम पर हाईकोर्ट सख्त, अफसरों को स्थायी समाधान निकालने के निर्देशलखनऊ शहर में लगातार बढ़ती ट्रैफिक समस्या और लंबे जाम को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा कि राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में वर्षों से ट्रैफिक जाम की समस्या बनी हुई है, लेकिन प्रशासन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं निकाल पाया है। कोर्ट ने अधिकारियों के जवाब पर नाराजगी जताते हुए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।पॉलिटेक्निक से किसान पथ तक जाम पर कोर्ट की नाराजगीसुनवाई के दौरान अदालत ने विशेष रूप से पॉलिटेक्निक चौराहे से किसान पथ तक रोजाना लगने वाले भारी जाम का मुद्दा उठाया। कोर्ट ने कहा कि इस मार्ग पर हजारों लोग प्रतिदिन घंटों जाम में फंसते हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राजधानी की सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है और संबंधित विभाग केवल अस्थायी उपायों तक सीमित हैं। जबकि समस्या का स्थायी और वैज्ञानिक समाधान जरूरी है।डीसीपी ट्रैफिक समेत कई अधिकारी कोर्ट में हुए पेशमामले की सुनवाई के दौरान लखनऊ पुलिस के डीसीपी ट्रैफिक, पूर्वी जोन के अधिकारी लखनऊ म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के अधिकारी अदालत में उपस्थित हुए। कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि आखिर इतने वर्षों बाद भी ट्रैफिक समस्या का प्रभावी समाधान क्यों नहीं निकाला जा सका।अदालत ने अधिकारियों के प्रस्तुत जवाबों पर असंतोष जताया और कहा कि केवल औपचारिक जवाब देकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। जनता रोजाना जाम की समस्या से जूझ रही है और प्रशासन की जवाबदेही तय होना आवश्यक है।जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सख्तीयह मामला शहर की ट्रैफिक अव्यवस्था को लेकर दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में कहा गया था कि राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर नियमित रूप से भारी जाम लगता है, जिससे लोगों का समय और ईंधन दोनों बर्बाद हो रहे हैं। साथ ही दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है।याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि स्कूल, ऑफिस और अस्पताल जाने वाले लोगों को रोजाना भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार एंबुलेंस तक जाम में फंस जाती हैं।हाईकोर्ट ने मांगी विस्तृत कार्ययोजनाअदालत ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे ट्रैफिक जाम की समस्या के स्थायी समाधान के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करें। इसमें सड़क चौड़ीकरण, अतिक्रमण हटाने, ट्रैफिक प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था और वैकल्पिक मार्गों जैसे बिंदुओं पर स्पष्ट योजना शामिल करने को कहा गया है।कोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश देते हुए कहा कि अगली सुनवाई में संबंधित अधिकारी पूरी रिपोर्ट के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों।जनता को राहत मिलने की उम्मीदहाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि राजधानी में लंबे समय से चली आ रही ट्रैफिक समस्या के समाधान की दिशा में प्रशासन गंभीर कदम उठा सकता है। शहरवासियों का कहना है कि यदि प्रभावी योजना लागू की गई तो रोजाना लगने वाले जाम से काफी राहत मिल सकती है।

लखनऊ केसरी से ओम की रिपोर्ट

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