Thursday, May 28, 2026

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मोहनलालगंज का ऐतिहासिक गेट हुआ गुमनाम, पुनर्निर्माण का इंतजार

लखनऊ। मोहनलालगंज की पहचान और गौरव का प्रतीक रहा ऐतिहासिक गेट आज सिर्फ यादों और तस्वीरों में सिमट कर रह गया है। कभी क्षेत्र की शान माने जाने वाला यह गेट अब अपने अस्तित्व के लिए तरस रहा है। गेट के टूटने के बाद काफी समय बीत चुका है, लेकिन अब तक इसके पुनर्निर्माण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।स्थानीय लोगों के अनुसार, यह गेट न केवल मोहनलालगंज की पहचान था, बल्कि क्षेत्र के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को भी दर्शाता था। यहां से गुजरने वाले लोग इस भव्य संरचना को देखकर क्षेत्र की विरासत का एहसास करते थे।जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा सड़क चौड़ीकरण और विकास कार्यों के दौरान इस ऐतिहासिक गेट को तोड़ा गया था। हालांकि गेट को हटाने के समय इसके पुनर्निर्माण का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इससे क्षेत्रवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।गेट के ध्वस्त होने के बाद से ही स्थानीय निवासी इसके पुनर्निर्माण की मांग कर रहे हैं। लेकिन अब तक न तो कोई स्पष्ट योजना सामने आई है और न ही निर्माण कार्य शुरू हो पाया है। इससे क्षेत्रवासियों में निराशा और असंतोष देखने को मिल रहा है।मोहनलालगंज के नागरिकों का कहना है कि यह गेट उनकी भावनाओं से जुड़ा हुआ है और इसका पुनर्निर्माण क्षेत्र की पहचान को फिर से जीवंत कर सकता है। उनका मानना है कि यदि सरकार और संबंधित विभाग इस दिशा में पहल करते हैं, तो यह न केवल ऐतिहासिक धरोहर को संजोने का काम होगा, बल्कि क्षेत्र के सौंदर्यीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।स्थानीय लोगों ने उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों से मांग की है कि जल्द से जल्द मोहनलालगंज के इस ऐतिहासिक गेट का पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि क्षेत्र की खोई हुई पहचान वापस मिल सके और आने वाली पीढ़ियां भी इस विरासत को देख सकें।अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार विभाग इस मांग पर कब तक ध्यान देते हैं और मोहनलालगंज को उसकी पुरानी पहचान कब लौटाई जाती है।

संवाददाता : आकाशदीप अवस्थी की रिपोर्ट

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मोहनलालगंज का ऐतिहासिक गेट हुआ गुमनाम, पुनर्निर्माण का इंतजार

लखनऊ। मोहनलालगंज की पहचान और गौरव का प्रतीक रहा ऐतिहासिक गेट आज सिर्फ यादों और तस्वीरों में सिमट कर रह गया है। कभी क्षेत्र की शान माने जाने वाला यह गेट अब अपने अस्तित्व के लिए तरस रहा है। गेट के टूटने के बाद काफी समय बीत चुका है, लेकिन अब तक इसके पुनर्निर्माण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।स्थानीय लोगों के अनुसार, यह गेट न केवल मोहनलालगंज की पहचान था, बल्कि क्षेत्र के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को भी दर्शाता था। यहां से गुजरने वाले लोग इस भव्य संरचना को देखकर क्षेत्र की विरासत का एहसास करते थे।जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा सड़क चौड़ीकरण और विकास कार्यों के दौरान इस ऐतिहासिक गेट को तोड़ा गया था। हालांकि गेट को हटाने के समय इसके पुनर्निर्माण का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इससे क्षेत्रवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।गेट के ध्वस्त होने के बाद से ही स्थानीय निवासी इसके पुनर्निर्माण की मांग कर रहे हैं। लेकिन अब तक न तो कोई स्पष्ट योजना सामने आई है और न ही निर्माण कार्य शुरू हो पाया है। इससे क्षेत्रवासियों में निराशा और असंतोष देखने को मिल रहा है।मोहनलालगंज के नागरिकों का कहना है कि यह गेट उनकी भावनाओं से जुड़ा हुआ है और इसका पुनर्निर्माण क्षेत्र की पहचान को फिर से जीवंत कर सकता है। उनका मानना है कि यदि सरकार और संबंधित विभाग इस दिशा में पहल करते हैं, तो यह न केवल ऐतिहासिक धरोहर को संजोने का काम होगा, बल्कि क्षेत्र के सौंदर्यीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।स्थानीय लोगों ने उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों से मांग की है कि जल्द से जल्द मोहनलालगंज के इस ऐतिहासिक गेट का पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि क्षेत्र की खोई हुई पहचान वापस मिल सके और आने वाली पीढ़ियां भी इस विरासत को देख सकें।अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार विभाग इस मांग पर कब तक ध्यान देते हैं और मोहनलालगंज को उसकी पुरानी पहचान कब लौटाई जाती है।

संवाददाता : आकाशदीप अवस्थी की रिपोर्ट

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