विनय मिश्रा
मोहनलालगंज विकास खंड के निगोहां क्षेत्र स्थित मस्तीपुर गांव में शुक्रवार को ग्राम प्रधान सूर्य कुमार द्विवेदी उर्फ फुल्लर की अगुवाई में “मेरा गांव मेरा गौरव (एमजीएमजी)” जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, लखनऊ की ओर से आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में किसानों, ग्रामीणों और महिलाओं ने भाग लिया।कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, स्वच्छता, मत्स्य पालन एवं आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करना रहा। विशेषज्ञों ने किसानों को खेती की लागत कम कर अधिक उत्पादन प्राप्त करने के उपाय बताए। साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा देने और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित प्रयोग पर विशेष जोर दिया गया।प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शरद कुमार सिंह ने कहा कि मृदा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किसानों को नियमित रूप से मिट्टी की जांच करानी चाहिए तथा आवश्यकता अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने नीम कोटेड यूरिया के फायदे बताते हुए कहा कि इससे फसल की उत्पादकता बढ़ती है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी सुरक्षित रहती है।वैज्ञानिक डॉ. रेशमा अंसारी ने किसानों को मत्स्य पालन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी देते हुए बताया कि तालाबों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन कर ग्रामीण अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने सरकार द्वारा संचालित मत्स्य पालन योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों से इन योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने फसल अवशेष प्रबंधन, जैविक खाद के उपयोग तथा गांव को स्वच्छ एवं स्वस्थ बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयास करने की जरूरत बताई। ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के प्रति भी जागरूक किया गया।ग्राम प्रधान सूर्य कुमार द्विवेदी उर्फ फुल्लर ने कहा कि गांव के किसानों को नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलना जरूरी है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।इस मौके पर डीएपी के अधिशासी अधिकारी, ग्राम सचिव संदीप यादव सहित बड़ी संख्या में किसान, ग्रामीण व क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे।



