Thursday, May 28, 2026

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लखनऊ के वीरांगना अवंतीबाई अस्पताल में मानवता शर्मसार: हिजाब न उतारने पर महिला को इलाज से वंचित करने का आरोप..

लखनऊ केसरी से ओम की रिपोर्ट

वीरांगना अवंतीबाई अस्पताल (गोलागंज) लखनऊ में मानवता शर्मसार, हिजाब उतारने से मना करने पर महिला को इलाज से किया गया वंचितलखनऊ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित वीरांगना अवंतीबाई अस्पताल (गोलागंज) लखनऊ से एक बेहद ही संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल के डॉक्टरों पर एक महिला मरीज को उसके धार्मिक पहनावे (हिजाब) के कारण इलाज देने से मना करने और दुर्व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगा है।क्या है पूरा मामला?मिली जानकारी के अनुसार, लखनऊ के मोअज्जम नगर की निवासी शरीन फिरदौस अपनी खराब तबीयत के कारण इलाज के लिए वीरांगना अवंतीबाई अस्पताल (गोलागंज) लखनऊ पहुंची थीं। बताया जा रहा है कि वहां मौजूद डॉक्टर ने शरीन को इलाज शुरू करने से पहले अपना हिजाब उतारने को कहा। जब शरीन ने अपनी धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए हिजाब उतारने से मना किया, तो डॉक्टर और वहां के स्टाफ ने कथित तौर पर उनका हाथ पकड़कर अस्पताल से बाहर निकाल दिया।मरीज की बिगड़ी हालत, तमाशबीन बने रहे जिम्मेदारशरीन फिरदौस की हालत पहले से ही नाजुक थी, और अस्पताल में हुए इस दुर्व्यवहार से उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुँचा। चश्मदीदों के मुताबिक, शरीन रो-रोकर बेहाल हो गईं और इसी तनाव में अपना मानसिक संतुलन खोकर बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं। दुखद पहलू यह रहा कि सामने खड़े डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मदद करने के बजाय तमाशबीन बने रहे।आजाद समाज पार्टी और सोशल यूथ विंग ने लिया संज्ञानइस अमानवीय घटना की खबर जैसे ही नवाब वाजिद अली (सचिव, 175 कैंट विधानसभा, आजाद समाज पार्टी) को मिली, उन्होंने तुरंत मोर्चा संभाला। नवाब वाजिद अली ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सोशल यूथ विंग के फाउंडर माहिर हसन खान को फोन पर पूरी स्थिति से अवगत कराया।माहिर हसन खान ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि किसी भी मरीज के साथ उसके पहनावे या धर्म के आधार पर भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने ऐलान किया है कि इस मामले में दोषी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कानूनी एक्शन लिया जाएगा। इस मुहिम में डॉ. नीलोफर भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ दे रही हैं।उठ रहे हैं गंभीर सवालक्या सरकारी अस्पतालों में इलाज अब मजहब देखकर होगा?मरीज की जान बचाने के बजाय डॉक्टर हिजाब जैसे मुद्दों को क्यों प्राथमिकता दे रहे हैं?बेहोश महिला को सड़क पर छोड़ने वाले डॉक्टरों पर प्रशासन कब करेगा कार्रवाई?

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लखनऊ के वीरांगना अवंतीबाई अस्पताल में मानवता शर्मसार: हिजाब न उतारने पर महिला को इलाज से वंचित करने का आरोप..

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वीरांगना अवंतीबाई अस्पताल (गोलागंज) लखनऊ में मानवता शर्मसार, हिजाब उतारने से मना करने पर महिला को इलाज से किया गया वंचितलखनऊ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित वीरांगना अवंतीबाई अस्पताल (गोलागंज) लखनऊ से एक बेहद ही संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल के डॉक्टरों पर एक महिला मरीज को उसके धार्मिक पहनावे (हिजाब) के कारण इलाज देने से मना करने और दुर्व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगा है।क्या है पूरा मामला?मिली जानकारी के अनुसार, लखनऊ के मोअज्जम नगर की निवासी शरीन फिरदौस अपनी खराब तबीयत के कारण इलाज के लिए वीरांगना अवंतीबाई अस्पताल (गोलागंज) लखनऊ पहुंची थीं। बताया जा रहा है कि वहां मौजूद डॉक्टर ने शरीन को इलाज शुरू करने से पहले अपना हिजाब उतारने को कहा। जब शरीन ने अपनी धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए हिजाब उतारने से मना किया, तो डॉक्टर और वहां के स्टाफ ने कथित तौर पर उनका हाथ पकड़कर अस्पताल से बाहर निकाल दिया।मरीज की बिगड़ी हालत, तमाशबीन बने रहे जिम्मेदारशरीन फिरदौस की हालत पहले से ही नाजुक थी, और अस्पताल में हुए इस दुर्व्यवहार से उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुँचा। चश्मदीदों के मुताबिक, शरीन रो-रोकर बेहाल हो गईं और इसी तनाव में अपना मानसिक संतुलन खोकर बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं। दुखद पहलू यह रहा कि सामने खड़े डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मदद करने के बजाय तमाशबीन बने रहे।आजाद समाज पार्टी और सोशल यूथ विंग ने लिया संज्ञानइस अमानवीय घटना की खबर जैसे ही नवाब वाजिद अली (सचिव, 175 कैंट विधानसभा, आजाद समाज पार्टी) को मिली, उन्होंने तुरंत मोर्चा संभाला। नवाब वाजिद अली ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सोशल यूथ विंग के फाउंडर माहिर हसन खान को फोन पर पूरी स्थिति से अवगत कराया।माहिर हसन खान ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि किसी भी मरीज के साथ उसके पहनावे या धर्म के आधार पर भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने ऐलान किया है कि इस मामले में दोषी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कानूनी एक्शन लिया जाएगा। इस मुहिम में डॉ. नीलोफर भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ दे रही हैं।उठ रहे हैं गंभीर सवालक्या सरकारी अस्पतालों में इलाज अब मजहब देखकर होगा?मरीज की जान बचाने के बजाय डॉक्टर हिजाब जैसे मुद्दों को क्यों प्राथमिकता दे रहे हैं?बेहोश महिला को सड़क पर छोड़ने वाले डॉक्टरों पर प्रशासन कब करेगा कार्रवाई?

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