Thursday, May 28, 2026

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देशभर में श्रद्धा के साथ मनाया गया वट सावित्री व्रत, सुहागिनों ने की विशेष पूजा-अर्चना

लखनऊ केसरी से मुकुल सिंह की रिपोर्ट

वट सावित्री व्रत के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों—दिल्ली, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश—में सुहागिन महिलाओं ने पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ व्रत रखकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना की।

सुबह से ही महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर वट (बरगद) वृक्ष के पास पहुंचीं और विधि-विधान से पूजा की। उन्होंने वृक्ष की परिक्रमा करते हुए कच्चा धागा बांधा तथा कथा का श्रवण किया।धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह व्रत सावित्री और सत्यवान की कथा से जुड़ा है। मान्यता है कि सावित्री ने अपने तप, बुद्धि और अटूट समर्पण से यमराज को प्रसन्न कर अपने पति सत्यवान को पुनर्जीवन दिलाया था। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य और दांपत्य सुख का प्रतीक माना जाता है।मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर भी विशेष आयोजन किए गए, जहां बड़ी संख्या में महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा की। कई स्थानों पर कथा-कीर्तन और भजन कार्यक्रमों का आयोजन भी हुआ।धार्मिक आस्था के इस पर्व पर महिलाओं ने दिनभर व्रत रखकर शाम को पूजा संपन्न की और परिवार की खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर बाजारों में भी पूजा सामग्री, फल और श्रृंगार के सामान की खरीदारी को लेकर रौनक देखने को मिली।विशेषज्ञों के अनुसार, वट सावित्री व्रत केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में वैवाहिक संबंधों की मजबूती और समर्पण का भी प्रतीक है।

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देशभर में श्रद्धा के साथ मनाया गया वट सावित्री व्रत, सुहागिनों ने की विशेष पूजा-अर्चना

लखनऊ केसरी से मुकुल सिंह की रिपोर्ट

वट सावित्री व्रत के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों—दिल्ली, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश—में सुहागिन महिलाओं ने पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ व्रत रखकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना की।

सुबह से ही महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर वट (बरगद) वृक्ष के पास पहुंचीं और विधि-विधान से पूजा की। उन्होंने वृक्ष की परिक्रमा करते हुए कच्चा धागा बांधा तथा कथा का श्रवण किया।धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह व्रत सावित्री और सत्यवान की कथा से जुड़ा है। मान्यता है कि सावित्री ने अपने तप, बुद्धि और अटूट समर्पण से यमराज को प्रसन्न कर अपने पति सत्यवान को पुनर्जीवन दिलाया था। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य और दांपत्य सुख का प्रतीक माना जाता है।मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर भी विशेष आयोजन किए गए, जहां बड़ी संख्या में महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा की। कई स्थानों पर कथा-कीर्तन और भजन कार्यक्रमों का आयोजन भी हुआ।धार्मिक आस्था के इस पर्व पर महिलाओं ने दिनभर व्रत रखकर शाम को पूजा संपन्न की और परिवार की खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर बाजारों में भी पूजा सामग्री, फल और श्रृंगार के सामान की खरीदारी को लेकर रौनक देखने को मिली।विशेषज्ञों के अनुसार, वट सावित्री व्रत केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में वैवाहिक संबंधों की मजबूती और समर्पण का भी प्रतीक है।

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