Thursday, May 28, 2026

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यूपी में जनगणना 2027 की तैयारी शुरू, पहली बार डिजिटल तरीके से होगा पूरा कार्य…..

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस संबंध में मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी एवं आईएएस अधिकारी शीतल वर्मा ने प्रेस कांफ्रेंस कर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस बार देश में पहली बार जनगणना का पूरा कार्य डिजिटल माध्यम से किया जाएगा।उन्होंने बताया कि भारत में पहली जनगणना वर्ष 1872 में शुरू हुई थी। जनगणना 2027 देश की 16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना होगी। उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में जनगणना कर्मियों का प्रशिक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है।जनगणना का कार्य दो चरणों में संपन्न कराया जाएगा। पहले चरण में 7 मई से 21 मई तक मकानों का सूचीकरण किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में 22 मई से 20 जून तक मकानों की विस्तृत जनगणना होगी।प्रशासन के अनुसार इस बार मोबाइल ऐप, ऑनलाइन पोर्टल और डिजिटल डाटाबेस के माध्यम से आंकड़े जुटाए जाएंगे। इससे डेटा संग्रह की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और सटीक होगी। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल प्रणाली से डुप्लीकेट एंट्री और आंकड़ों में त्रुटियों की संभावना भी कम होगी।राज्य सरकार का दावा है कि डिजिटल जनगणना से भविष्य की योजनाओं और विकास कार्यों के लिए अधिक विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे।

लखनऊ केसरी से ओम की रिपोर्ट

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यूपी में जनगणना 2027 की तैयारी शुरू, पहली बार डिजिटल तरीके से होगा पूरा कार्य…..

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस संबंध में मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी एवं आईएएस अधिकारी शीतल वर्मा ने प्रेस कांफ्रेंस कर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस बार देश में पहली बार जनगणना का पूरा कार्य डिजिटल माध्यम से किया जाएगा।उन्होंने बताया कि भारत में पहली जनगणना वर्ष 1872 में शुरू हुई थी। जनगणना 2027 देश की 16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना होगी। उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में जनगणना कर्मियों का प्रशिक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है।जनगणना का कार्य दो चरणों में संपन्न कराया जाएगा। पहले चरण में 7 मई से 21 मई तक मकानों का सूचीकरण किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में 22 मई से 20 जून तक मकानों की विस्तृत जनगणना होगी।प्रशासन के अनुसार इस बार मोबाइल ऐप, ऑनलाइन पोर्टल और डिजिटल डाटाबेस के माध्यम से आंकड़े जुटाए जाएंगे। इससे डेटा संग्रह की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और सटीक होगी। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल प्रणाली से डुप्लीकेट एंट्री और आंकड़ों में त्रुटियों की संभावना भी कम होगी।राज्य सरकार का दावा है कि डिजिटल जनगणना से भविष्य की योजनाओं और विकास कार्यों के लिए अधिक विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे।

लखनऊ केसरी से ओम की रिपोर्ट

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