Thursday, May 28, 2026

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इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक ने शुरू किया ‘स्वयं सहायता समूह बचत खाता’, ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा बड़ा लाभ….

इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक (आईपीपीबी) ने स्वयं सहायता समूह (SHG) के लिए नया बचत खाता शुरू करने की घोषणा की है। संचार मंत्रालय के डाक विभाग के अंतर्गत संचालित इस सरकारी बैंक का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना और महिला नेतृत्व वाले समूहों को सशक्त बनाना है।आईपीपीबी के प्रबंध निदेशक और सीईओ आर. विश्वेश्वरन ने बताया कि यह पहल बैंकिंग सेवाओं को सरल, सुलभ और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि डोरस्टेप बैंकिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।भारत में स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं और ये राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन तथा नाबार्ड जैसी योजनाओं से जुड़े होते हैं। आईपीपीबी अब डाक नेटवर्क और ग्रामीण डाक सेवकों की मदद से इन समूहों तक घर-घर बैंकिंग सुविधा पहुंचाएगा। खाते की मुख्य विशेषताएं: शून्य बैलेंस और शून्य शुल्क खातान्यूनतम जमा राशि की आवश्यकता नहींअधिकतम जमा सीमा: ₹2 लाखत्रैमासिक ब्याज भुगताननकद जमा और निकासी पर कोई शुल्क नहींमुफ्त मासिक स्टेटमेंटखाता बंद करने पर कोई शुल्क नहींक्यूआर कार्ड मुफ्त जारीआईपीपीबी की स्थापना 1 सितंबर 2018 को हुई थी और यह पूरी तरह भारत सरकार के स्वामित्व में है। बैंक देशभर में लाखों डाकघरों और करीब 3 लाख डाक कर्मचारियों के नेटवर्क के जरिए 13 करोड़ से अधिक ग्राहकों को बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर रहा है।यह पहल ‘डिजिटल इंडिया’ और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

लखनऊ लखनऊ केसरी से ओम की रिपोर्ट

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इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक ने शुरू किया ‘स्वयं सहायता समूह बचत खाता’, ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा बड़ा लाभ….

इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक (आईपीपीबी) ने स्वयं सहायता समूह (SHG) के लिए नया बचत खाता शुरू करने की घोषणा की है। संचार मंत्रालय के डाक विभाग के अंतर्गत संचालित इस सरकारी बैंक का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना और महिला नेतृत्व वाले समूहों को सशक्त बनाना है।आईपीपीबी के प्रबंध निदेशक और सीईओ आर. विश्वेश्वरन ने बताया कि यह पहल बैंकिंग सेवाओं को सरल, सुलभ और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि डोरस्टेप बैंकिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।भारत में स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं और ये राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन तथा नाबार्ड जैसी योजनाओं से जुड़े होते हैं। आईपीपीबी अब डाक नेटवर्क और ग्रामीण डाक सेवकों की मदद से इन समूहों तक घर-घर बैंकिंग सुविधा पहुंचाएगा। खाते की मुख्य विशेषताएं: शून्य बैलेंस और शून्य शुल्क खातान्यूनतम जमा राशि की आवश्यकता नहींअधिकतम जमा सीमा: ₹2 लाखत्रैमासिक ब्याज भुगताननकद जमा और निकासी पर कोई शुल्क नहींमुफ्त मासिक स्टेटमेंटखाता बंद करने पर कोई शुल्क नहींक्यूआर कार्ड मुफ्त जारीआईपीपीबी की स्थापना 1 सितंबर 2018 को हुई थी और यह पूरी तरह भारत सरकार के स्वामित्व में है। बैंक देशभर में लाखों डाकघरों और करीब 3 लाख डाक कर्मचारियों के नेटवर्क के जरिए 13 करोड़ से अधिक ग्राहकों को बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर रहा है।यह पहल ‘डिजिटल इंडिया’ और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

लखनऊ लखनऊ केसरी से ओम की रिपोर्ट

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