Thursday, July 30, 2026

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थाना समाधान दिवस में इंस्पेक्टर ने सुनी फरियाद नहीं पहुंचे राजस्व विभाग से अधिकारी निगोहा नगराम का भी यही हाल राजस्व विभाग की लापरवाही

मोहनलालगंज, लखनऊ। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप थाना समाधान दिवस को आम जनता की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निस्तारण का माध्यम बनाने के दावे शनिवार को मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र में खोखले साबित होते नजर आए। मोहनलालगंज, निगोहां और नगराम थानों में आयोजित थाना समाधान दिवस में राजस्व विभाग के जिम्मेदार तहसील अधिकारियों की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। अधिकारियों के बजाय केवल कुछ राजस्वकर्मियों को भेजकर खानापूर्ति कर दी गई, जिससे भूमि विवाद और राजस्व संबंधी शिकायतों के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचे फरियादियों को मायूस होकर लौटना पड़ा।थाना समाधान दिवस का उद्देश्य पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों की संयुक्त मौजूदगी में मौके पर ही शिकायतों का निस्तारण करना है। लेकिन शनिवार को तीनों थानों में पुलिस अधिकारी तो पूरे समय मौजूद रहे और फरियादियों की शिकायतें सुनते रहे, जबकि तहसील प्रशासन की ओर से न तो उपजिलाधिकारी पहुंचे और न ही अन्य जिम्मेदार राजस्व अधिकारी। ऐसे में अधिकांश राजस्व मामलों में कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका।शिकायत कर्ताओं का कहना है कि राजस्व विभाग के अधिकारी लगातार थाना समाधान दिवस को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। केवल लेखपाल या अन्य कर्मचारियों को भेजकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है, जबकि विवादित भूमि, पैमाइश, कब्जा और सीमांकन जैसे मामलों का निस्तारण सक्षम अधिकारियों की मौजूदगी के बिना संभव नहीं है। इससे शिकायतें लंबित रहती हैं और फरियादियों को बार-बार तहसील और थाने के चक्कर लगाने पड़ते हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व विभाग की यही कार्यशैली वर्षों से भूमि विवादों के लंबित रहने का बड़ा कारण बनी हुई है। जब समाधान दिवस में ही जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित नहीं होंगे तो सरकार की मंशा के अनुरूप मौके पर न्याय और त्वरित समाधान कैसे मिलेगा। लोगों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि जनता का समय और विश्वास दोनों बर्बाद हो रहे हैं।गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि थाना समाधान दिवस में पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से उपस्थित रहकर शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करें। इसके बावजूद राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र में ही इन निर्देशों की अनदेखी होना कई सवाल खड़े करता है। यदि राजधानी में ही सरकारी आदेशों का यह हाल है तो अन्य जिलों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।क्षेत्रीय लोगों ने जिला अधिकारी से मांग की है कि थाना समाधान दिवस से गैरहाजिर रहने वाले जिम्मेदार तहसील अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा भविष्य में ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि जब तक राजस्व विभाग के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से नहीं निभाएंगे, तब तक थाना समाधान दिवस केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह जाएगा और आम जनता को राहत मिलने के बजाय केवल आश्वासन ही मिलता रहेगा।

*अनुराग तिवारी की रिपोर्ट*

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थाना समाधान दिवस में इंस्पेक्टर ने सुनी फरियाद नहीं पहुंचे राजस्व विभाग से अधिकारी निगोहा नगराम का भी यही हाल राजस्व विभाग की लापरवाही

मोहनलालगंज, लखनऊ। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप थाना समाधान दिवस को आम जनता की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निस्तारण का माध्यम बनाने के दावे शनिवार को मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र में खोखले साबित होते नजर आए। मोहनलालगंज, निगोहां और नगराम थानों में आयोजित थाना समाधान दिवस में राजस्व विभाग के जिम्मेदार तहसील अधिकारियों की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। अधिकारियों के बजाय केवल कुछ राजस्वकर्मियों को भेजकर खानापूर्ति कर दी गई, जिससे भूमि विवाद और राजस्व संबंधी शिकायतों के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचे फरियादियों को मायूस होकर लौटना पड़ा।थाना समाधान दिवस का उद्देश्य पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों की संयुक्त मौजूदगी में मौके पर ही शिकायतों का निस्तारण करना है। लेकिन शनिवार को तीनों थानों में पुलिस अधिकारी तो पूरे समय मौजूद रहे और फरियादियों की शिकायतें सुनते रहे, जबकि तहसील प्रशासन की ओर से न तो उपजिलाधिकारी पहुंचे और न ही अन्य जिम्मेदार राजस्व अधिकारी। ऐसे में अधिकांश राजस्व मामलों में कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका।शिकायत कर्ताओं का कहना है कि राजस्व विभाग के अधिकारी लगातार थाना समाधान दिवस को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। केवल लेखपाल या अन्य कर्मचारियों को भेजकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है, जबकि विवादित भूमि, पैमाइश, कब्जा और सीमांकन जैसे मामलों का निस्तारण सक्षम अधिकारियों की मौजूदगी के बिना संभव नहीं है। इससे शिकायतें लंबित रहती हैं और फरियादियों को बार-बार तहसील और थाने के चक्कर लगाने पड़ते हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व विभाग की यही कार्यशैली वर्षों से भूमि विवादों के लंबित रहने का बड़ा कारण बनी हुई है। जब समाधान दिवस में ही जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित नहीं होंगे तो सरकार की मंशा के अनुरूप मौके पर न्याय और त्वरित समाधान कैसे मिलेगा। लोगों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि जनता का समय और विश्वास दोनों बर्बाद हो रहे हैं।गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि थाना समाधान दिवस में पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से उपस्थित रहकर शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करें। इसके बावजूद राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र में ही इन निर्देशों की अनदेखी होना कई सवाल खड़े करता है। यदि राजधानी में ही सरकारी आदेशों का यह हाल है तो अन्य जिलों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।क्षेत्रीय लोगों ने जिला अधिकारी से मांग की है कि थाना समाधान दिवस से गैरहाजिर रहने वाले जिम्मेदार तहसील अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा भविष्य में ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि जब तक राजस्व विभाग के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से नहीं निभाएंगे, तब तक थाना समाधान दिवस केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह जाएगा और आम जनता को राहत मिलने के बजाय केवल आश्वासन ही मिलता रहेगा।

*अनुराग तिवारी की रिपोर्ट*

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