बैंकों में लावारिस जमा 67,000 करोड़ के पार, 29% रकम अकेले SBI में
नई दिल्ली। देश के बैंकिंग तंत्र में एक चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आई है। बैंकों में पड़ी लावारिस (अनक्लेम्ड) जमा राशि बढ़कर करीब 67,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इसमें से लगभग 29 प्रतिशत राशि अकेले भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के पास जमा है। यह आंकड़ा न केवल बैंकिंग व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि आम नागरिकों की वित्तीय जागरूकता पर भी सवाल खड़े करता है।
क्या होती है लावारिस जमा..
लावारिस जमा वह रकम होती है, जिसे खाताधारक या उनके नामित व्यक्ति (नॉमिनी/उत्तराधिकारी) लंबे समय तक नहीं निकालते।
नियमों के अनुसार, यदि कोई खाता 10 वर्षों तक निष्क्रिय रहता है, तो उसमें जमा राशि को “अनक्लेम्ड” श्रेणी में डाल दिया जाता है।
SBI में सबसे बड़ा हिस्सा
देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय स्टेट बैंक के पास इस राशि का सबसे बड़ा हिस्सा होना स्वाभाविक भी माना जा रहा है, क्योंकि इसके खाताधारकों की संख्या सबसे अधिक है।
हालांकि, अन्य सरकारी और निजी बैंकों में भी हजारों करोड़ रुपये इसी तरह बिना दावे के पड़े हैं। बढ़ती रकम के पीछे ये कारण विशेषज्ञों के मुताबिक, लावारिस जमा बढ़ने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं l
खाताधारक की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारियों को जानकारी न होना
नॉमिनी का नाम दर्ज न होना
लंबे समय से निष्क्रिय पड़े खाते
बैंक शाखा या शहर बदलने के बाद पुराने खातों को नजरअंदाज करना
केवाईसी (KYC) और संपर्क जानकारी अपडेट न करना
पैसे का क्या होता है?
जब कोई राशि 10 साल तक अनक्लेम्ड रहती है, तो उसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (DEAF) में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि , खाताधारक या उनके वारिस बाद में भी इस राशि को क्लेम कर सकते हैं l
इसके लिए बैंक में निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होती है
RBI और बैंकों की पहल
भारतीय रिजर्व बैंक और बैंक समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाते हैं ताकि लोग अपने पुराने खातों और जमा राशि की जानकारी रखें।
इसके अलावा, कई बैंक अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी अनक्लेम्ड डिपॉजिट की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।
आम लोगों के लिए जरूरी सुझाव हर बैंक खाते में नॉमिनी जरूर जोड़ें परिवार के सदस्यों को खातों की जानकारी दें,
समय-समय पर खातों की स्थिति जांचते रहें l
निष्क्रिय खातों को बंद या अपडेट कराएं l
लावारिस जमा का बढ़ता आंकड़ा वित्तीय प्रबंधन में लापरवाही को दर्शाता है। यदि समय रहते जागरूकता बढ़ाई जाए और लोग अपने बैंकिंग रिकॉर्ड को अपडेट रखें, तो हजारों करोड़ रुपये बेकार पड़े रहने की स्थिति से बचा जा सकता है।
संवाददाता : ओम की रिपोर्ट
बैंकों में लावारिस जमा 67,000 करोड़ के पार, 29% रकम अकेले SBI में
बैंकों में लावारिस जमा 67,000 करोड़ के पार, 29% रकम अकेले SBI में
बैंकों में लावारिस जमा 67,000 करोड़ के पार, 29% रकम अकेले SBI में
नई दिल्ली। देश के बैंकिंग तंत्र में एक चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आई है। बैंकों में पड़ी लावारिस (अनक्लेम्ड) जमा राशि बढ़कर करीब 67,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इसमें से लगभग 29 प्रतिशत राशि अकेले भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के पास जमा है। यह आंकड़ा न केवल बैंकिंग व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि आम नागरिकों की वित्तीय जागरूकता पर भी सवाल खड़े करता है।
क्या होती है लावारिस जमा..
लावारिस जमा वह रकम होती है, जिसे खाताधारक या उनके नामित व्यक्ति (नॉमिनी/उत्तराधिकारी) लंबे समय तक नहीं निकालते।
नियमों के अनुसार, यदि कोई खाता 10 वर्षों तक निष्क्रिय रहता है, तो उसमें जमा राशि को “अनक्लेम्ड” श्रेणी में डाल दिया जाता है।
SBI में सबसे बड़ा हिस्सा
देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय स्टेट बैंक के पास इस राशि का सबसे बड़ा हिस्सा होना स्वाभाविक भी माना जा रहा है, क्योंकि इसके खाताधारकों की संख्या सबसे अधिक है।
हालांकि, अन्य सरकारी और निजी बैंकों में भी हजारों करोड़ रुपये इसी तरह बिना दावे के पड़े हैं। बढ़ती रकम के पीछे ये कारण विशेषज्ञों के मुताबिक, लावारिस जमा बढ़ने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं l
खाताधारक की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारियों को जानकारी न होना
नॉमिनी का नाम दर्ज न होना
लंबे समय से निष्क्रिय पड़े खाते
बैंक शाखा या शहर बदलने के बाद पुराने खातों को नजरअंदाज करना
केवाईसी (KYC) और संपर्क जानकारी अपडेट न करना
पैसे का क्या होता है?
जब कोई राशि 10 साल तक अनक्लेम्ड रहती है, तो उसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (DEAF) में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि , खाताधारक या उनके वारिस बाद में भी इस राशि को क्लेम कर सकते हैं l
इसके लिए बैंक में निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होती है
RBI और बैंकों की पहल
भारतीय रिजर्व बैंक और बैंक समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाते हैं ताकि लोग अपने पुराने खातों और जमा राशि की जानकारी रखें।
इसके अलावा, कई बैंक अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी अनक्लेम्ड डिपॉजिट की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।
आम लोगों के लिए जरूरी सुझाव हर बैंक खाते में नॉमिनी जरूर जोड़ें परिवार के सदस्यों को खातों की जानकारी दें,
समय-समय पर खातों की स्थिति जांचते रहें l
निष्क्रिय खातों को बंद या अपडेट कराएं l
लावारिस जमा का बढ़ता आंकड़ा वित्तीय प्रबंधन में लापरवाही को दर्शाता है। यदि समय रहते जागरूकता बढ़ाई जाए और लोग अपने बैंकिंग रिकॉर्ड को अपडेट रखें, तो हजारों करोड़ रुपये बेकार पड़े रहने की स्थिति से बचा जा सकता है।
संवाददाता : ओम की रिपोर्ट



