विनय मिश्रा
पीजीआई, लखनऊ। राजधानी के बहुचर्चित प्रॉपर्टी कारोबारी संदीप सिंह हत्याकांड की जांच में बड़ा मोड़ आया है। अब तक सुपारी किलिंग के रूप में देखे जा रहे इस मामले में पुलिस विवेचना के दौरान माफिया दिलीप वर्मा का नाम भी शामिल कर लिया गया है। पीजीआई पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की संयुक्त जांच में ऐसे कई तकनीकी और डिजिटल साक्ष्य सामने आए हैं, जिनसे दिलीप वर्मा का दोनों शूटरों से सीधे संपर्क होने की पुष्टि होने का दावा किया गया है।पीजीआई थाना प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार सिंह के अनुसार, गिरफ्तार शूटर सचिन कुमार के बयान, एसटीएफ मुठभेड़ में मारे गए मुख्य शूटर संजीव कुमार के बेटे अमरेश कुमार के बयान तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर विवेचना में दिलीप वर्मा का नाम औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों शूटर पहले से उसके लिए काम करते रहे थे और हत्या के दौरान भी उसके संपर्क में थे।गिरफ्तारी के लिए कई ठिकानों पर दबिशविवेचना में नाम सामने आने के बाद पुलिस ने दिलीप वर्मा की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं। पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीमें उसके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन, डिजिटल साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि पूरे षड्यंत्र में शामिल सभी लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।सीसीटीवी और सर्विलांस से खुली साजिशपुलिस जांच में सामने आया कि संदीप सिंह की हत्या की योजना काफी पहले से बनाई गई थी। घटना के बाद सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल सर्विलांस और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने साजिशकर्ता दिनेश यादव, उसके ड्राइवर मुकर्बिन तथा दोनों पक्षों के बीच संपर्क कराने वाले गंगाराम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पूछताछ में पता चला कि शूटरों को मोटी एडवांस रकम देकर हत्या की सुपारी दी गई थी।जांच में यह भी सामने आया कि वारदात से पहले शूटर कई बार लखनऊ आए और संदीप सिंह के घर, कार्यालय, आने-जाने के रास्तों तथा दिनचर्या की रेकी की। हत्या में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल भी पहले से खरीदी गई थी और पहचान छिपाने के लिए उसकी नंबर प्लेट हटा दी गई थी।एसटीएफ मुठभेड़ में मारा गया मुख्य शूटरजांच के दौरान एसटीएफ मुख्य शूटर संजीव कुमार तक पहुंची। बीते 27 जून को हुई मुठभेड़ में संजीव कुमार मारा गया। पुलिस के अनुसार, संदीप सिंह पर सीधे गोलियां उसी ने चलाई थीं। उसके बाद भी जांच जारी रही और कई नए तथ्य सामने आए।संजीव कुमार के बेटे अमरेश कुमार ने पुलिस और एसटीएफ को दिए बयान में बताया कि उसके पिता ने ही संदीप सिंह की हत्या की थी तथा वारदात के समय डॉक्टर रंगा बाइक चला रहा था। उसने यह भी दावा किया कि उसके पिता लंबे समय से माफिया दिलीप वर्मा के संपर्क में थे और उसके लिए कई आपराधिक वारदातों को अंजाम दे चुके थे।दूसरे शूटर की गिरफ्तारी, हथियार बरामदअमरेश के बयान और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर एसटीएफ ने एक लाख रुपये के इनामी दूसरे शूटर सचिन कुमार को पीजीआई क्षेत्र से गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से हत्या में प्रयुक्त 0.32 बोर की अवैध पिस्टल, तीन जिंदा कारतूस और बिना नंबर प्लेट की मोटरसाइकिल बरामद की गई। पूछताछ में सचिन ने स्वीकार किया कि वारदात के समय वही बाइक चला रहा था, जबकि पीछे बैठे संजीव कुमार ने संदीप सिंह पर गोलियां चलाई थीं।कई राज्यों तक फैला नेटवर्कएसटीएफ की जांच में यह भी सामने आया कि संजीव कुमार का आपराधिक नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। वह महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और नेपाल तक सक्रिय था तथा वारदातों को अंजाम देने के बाद मुंबई, कोलकाता और नेपाल में जाकर छिप जाता था। अब जांच एजेंसियां उसके पूरे नेटवर्क, आर्थिक लेन-देन और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की गहन जांच कर रही हैं।इंस्पेक्टर सुनील कुमार सिंह ने बताया कि उपलब्ध साक्ष्यों, शूटरों के बयानों और तकनीकी जांच के आधार पर दिलीप वर्मा की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि विवेचना आगे बढ़ने के साथ इस हत्याकांड से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी स्पष्ट होगी और सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



